‘लोककवि रत्न हलधर नाग की संघर्ष कहानी

हलधर नाग ओड़ीसा के कोसली भाषा के कवि एवम लेखक हैं। वे ‘लोककवि रत्न’ के नाम से प्रसिद्ध हैं। भारत सरकार द्वारा उन्हें २०१६ में पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

 

पैर में बिना जूता या चप्पल पहने आप कितने दिन रह सकते हो? चलो वो भी छोड़ो नंगे पैर आप सड़क पर कितनी दूर चल सकते हो? इस ख्याल से ही डर सा लगने लगता है कि नंगे पाँव कंकरीली पथरीली सड़क पर कैसे चला जायेगा? लेकिन एक शख्स ऐसा भी है जिसने अपनी जिन्दगी में कभी अपने पाँव में कोई चप्पल या जूता नही पहना है और वो 66 साल से नंगे पाँव ही रह रहे हैं।

पिछले दिनों (March  2016) में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कुछ हस्तियों को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान पदमश्री, पदम भूषण और पदम विभूषण से नवाजा है। जिनमें से 83 लोगों को 2016 का पदमश्री सम्मान मिला है। जिनमें मुख्य रूप से अजय देवगन, प्रियंका चौपड़ा, दिलीप संघवी आदि हैं। पदमश्री अवार्ड भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला भारत रत्न के बाद चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। जो कला, शिक्षा, साहित्य, विज्ञान, खेल, चिकित्सा, इण्डस्ट्री तथा समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने पर दिया जाता है।

 

इन्ही 83 लोगों में से एक नाम ऐसा भी है जिन्होंने अपनी जिन्दगी में गरीबी और संधर्ष के अलावा कुछ देखा ही नही है। वो महज कक्षा 3 तक ही पढ़े हैं। लेकिन अपनी प्रतिभा की बदौलत आज उन्हें देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पदमश्री सम्मान’ से नवाजा गया है। देश के राष्ट्रपति के हाथों से सम्मान पाना बड़े ही गौरव की बात होती है।

लेकिन बड़ी बड़ी हस्तियों के आगे उनके बारे में ना टी वी, समाचार पत्र में ज्यादा कुछ देखने, पढने को मिला और ना ही सोशल मीडिया पर। और शायद ज्यादातर लोगों ने पहले कभी उनका नाम भी ना सुना हो। लेकिन जब आप उनकी जिन्दगी के बारे में जानेंगे तो आप सोचने के लिये मजबूर हो जायेंगे कि उनकी ये उपलब्धि कितनी बड़ी है।

उस शख्स का नाम है हलधर नाग। 66 वर्षीय हलधर नाग ओडिशा के रहने वाले हैं तथा कोसली भाषा के कवि हैं। हलधर नाग सिर्फ तीसरी कक्षा तक पढ़ें है। अपनी गरीबी के कारण नाग ने अपनी जिन्दगी में कभी अपने पैर में जूते, चप्पल नही पहने। पेट पालने के लिये उन्हें एक दुकान पर बर्तन माँजने पड़े। लेकिन इतनी मुसीबतों को झेलने वाले हलधर नाग के जीवन पर आज 5 लोग PhD कर रहे हैं। और उनकी कविताओं को ओडिशा की संबलपुर यूनिवर्सिटी के syllabus में शामिल किया गया है।

आज मैं Gyan Versha पर उनके जीवन से जुड़ी कुछ बातें तथा उनके संघर्ष की कहानी बताने जा रहा हूँ।

 

हलधर नाग का बचपन

हलधर नाग का जन्म ओडिशा के बारगढ़ जिले के घेंस गाँव में 31 मार्च 1950 को एक बहुत ही गरीब परिवार में हुआ था। जब वे मात्र 10 वर्ष के थे तभी उनके पिता की मृत्यु हो गयी। पिता की मौत के बाद उनके घर की आर्थिक स्थिति बहुत बिगड़ गयी जिसके कारण उन्हें तीसरी कक्षा में ही स्कूल छोड़ना पड़ा। और उसके बाद अपनी गरीबी के कारण उन्हें फिर कभी पढने का मौका नहीं मिल पाया।

मिठाई की दुकान पर धोये बर्तन, स्कूल में बनाया खाना

घर की हालत ज्यादा बिगड़ने पर उन्होंने कम उम्र में ही अपनी तथा अपनी विधवा माँ की जिम्मेदारी उठा ली और पास की एक मिठाई की दुकान में बर्तन धोने का काम शुरू कर दिया। ताकि अपना व अपने परिवार का पेट पाल सकें। लगभग दो साल तक उस दुकान पर काम करने के बाद उनके गाँव के सरपंच ने उन्हें एक हाईस्कूल में बावर्ची के काम पर लगा दिया। जहाँ वह स्कूल के बच्चों के लिए खाना बनाते थे। लगभग 16 साल तक वे उस स्कूल में खाना बनाने की नौकरी करते रहे।

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