मधुमक्खी पालन करने के तरीके

मधु, परागकण आदि की प्राप्ति के लिये मधुमक्खियाँ पाली जातीं हैं. यह एक क्रिषि आधारित उद्योग है. मधुमक्खियां फूलों के रस को शहद में बदल देती हैं और उन्हें अपने छत्तों में जमा करती हैं. जंगलों से मधु एकत्र करने की परंपरा लंबे समय से लुप्त हो रही है. बाजार में शहद और इसके उत्पादों की बढ़ती मांग के कारण मधुमक्खी पालन अब एक लाभदायक और आकर्षक उद्यम के रूप में स्थापित हो चला है. मधुमक्खी पालन के उत्पाद के रूप में शहद और मोम आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं.

मधुमक्खी पालन उद्योग करनेवालों की खादी ग्राम उद्योग कई मात्रा में मदद करता है .  मधुमक्खी पालन एक लघु व्यवसाय है, जिससे शहद एवं मोम प्राप्त होता है. यह एक ऐसा व्यवसाय है, जो ग्रामीण क्षेत्रों के विकास का पर्याय बनता जा रहा है. गौर करनेवाली बात यह है कि शहद उत्पादन के मामले में भारत पांचवें स्थान पर है.

 

आरंभ करने से पूर्व की आवश्यकताएं इस प्रकार हैं :

  • मधुमक्खी पालन की जानकारी & प्रशिक्षण. मधुमक्खी पालन के प्रशिक्षण के लिए आप स्थानीय कृषि विभाग या कृषि विश्वविद्यालय में संपर्क कर सकते हैं.
  • स्थानीय मधुमक्खियों की जानकारी
  • स्थानीय प्रजाति की मधुमक्खियों की उपलब्धता
  • प्रवासी मधुमक्खियों की जानकारी

 

ऋण-व्यवस्था :

इस उद्योग के लिए सरकार ने राष्ट्रीयकृत बैंकों से लोन सुविधा उपलब्ध करवाई है. इस व्यवसाय के लिए 2 से 5 लाख रुपए तक का लोन उपलब्ध है, चूंकि यह उद्योग लघु उद्योग श्रेणी के अंतर्गत आता है. इस उद्योग की जानकारी के लिए उद्यान विभाग से भी संपर्क कर सकते है.

 

प्रशिक्षण :

शहद उत्पन्न करने के लिए उचित वातावरण, नए-नए उपकरण एवं प्रबंध की जानकारी, उत्पादन के लिए उच्चकोटि की तकनीक, अधिक शहद देने वाली मधुमक्खियों की प्रजातियां, नस्ल सुधार एवं रोगों से बचने की सम्यक जानकारी तथा वैज्ञानिक विधि से मधुमक्खी पालन में नवनिर्मित तकनीक आदि का ज्ञान दिया जाता है.

 

मधुमक्खी के प्रकार :

इस व्यवसाय के लिए चार तरह की मधुमक्खियां इस्तेमाल होती हैं. ये हैं- एपिस मेलीफेरा, एपिस इंडिका, एपिस डोरसाला और एपिस फ्लोरिया. इस व्यवसाय के लिए एपिस मेलीफेरा मक्खियां ही अधिक शहद उत्पादन करने वाली और स्वभाव की शांत होती हैं. इन्हें डिब्बों में आसानी से पाला जा सकता है. इस प्रजाति की रानी मक्खी में अंडे देने की क्षमता भी अधिक होती है.

 

सामग्री :

मधुमक्खी पालन के लिए लकड़ी का बॉक्स, बॉक्सफ्रेम, मुंह पर ढकने के लिए जालीदार कवर, दस्तानें, चाकू, शहद, रिमूविंग मशीन, शहद इकट्ठा करने के लिए ड्रम.

 

सावधानी :

जहां मधुमक्खियां पाली जाएं, उसके आसपास की जमीन साफ-सुथरी होनी चाहिए. बड़े चींटे, मोमभझी कीड़े, छिपकली, चूहे, गिरगिट तथा भालू मधुमक्खियों के दुश्मन हैं, इनसे बचाव के पूरे इंतजाम होने चाहिए.

 

उपयुक्त वातावरण :

फूलों की खेती के साथ यह उद्योग अधिक फायदेमंद होता है . जिससे  20 से 80 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो जाती है. सूरजमुखी, गाजर, मिर्च, सोयाबीन, पॉपीलेनटिल्स ग्रैम, फलदार पेडमें जैसे नींबू, कीनू, आंवला, पपीता, अमरूद, आम, संतरा, मौसमी, अंगूर, यूकेलिप्टस और गुलमोहर जैसे पेडवाले क्षेत्रों में मधुमक्खी पालन आसानी से किया जा सकता है .

 

उपयुक्त समय :

मधुमक्खी पालन के लिए जनवरी से मार्च का समय सबसे उपयुक्त है, लेकिन नवंबर से फरवरी का समय तो इस व्यवसाय के लिए वरदान है.

 

मधुमक्खी पालन में परागण के लिए मधुमक्खियों का प्रबंधन :

  • छत्तों को खेत के बहुत ही पास रखने की सलाह दी जाती है ताकि मधुमक्खियों की उर्जा बची रहे
  • प्रवासी मधुमक्खियों के छत्ते को खेत के पास उस जगह रखा जाना चाहिए जहां कम से कम दस फीसदी फूल लगे हों
  • प्रति हेक्टेयर पर तीन इटालियन मधुमक्खी और प्रति हेक्टेयर पांच भारतीय प्रजाति के मधुमक्खियों के छत्ते लगाने की सलाह दी जाती है
  • मधुमक्खियों में होने वाली बीमारी से बचने के लिए स्थानीय कृषि विभाग की सलाह ली जानी चाहिए.
  • मधुमक्खी पालन आरंभ करने के लिए शुरूआती लागत तकरीबन सवा दो लाख रूपए आती है
  • अगस्त से सितंबर का माह मधुमक्खी पालन शुरू करने के लिए उपयुक्त समय होता है
  • फूलों के मौसम के बीत जाने के बाद मधुमक्खी से उत्पाद निकालने की प्रक्रिया शुरू करने का सही वक्त होता है.
  • छत्ते से शहद निकालने के लिए उपयुक्त उपकरण की मदद से किया जाना चाहिए.

 

 

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