भेड पालन व्यवसाय आरंभ कैसे करें ?

  1. परिचय

ऊन, मांस, दूध, खाल और खाद के लिए अपनी बहु उपयोगिता के साथ भेड, विशेष रुप से देश शुष्क, अर्ध शुष्क और पहाडी क्षेत्रों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण घटक है.यह ऊन और जानवरों की बिक्री के माध्यम से चरवाहों के लिए आय का एक भरासेमंद स्त्रोत है. भेड पालन के लाभ इस प्रकार है.

ए. भेडों को रखने के लिए महंगे भवनों की जरुरत नहीं है और दूसरी ओर, अन्य पशुओं की तुलना में इसके पालन में कम श्रम की आवश्यकता होती है.

बी. मूल पशुधन अपेक्षाकृत सस्ते है और इसकी संख्या में तेजी से वृध्दी की जा सकती है.

सी. घास को मांस और ऊन में परिवर्तित करने वाला भेड एक किफायती पशु है.

डी. अन्य प्रकार के पशुधन की तुलना में विभिन्न प्रकार के पौधे भेडों का आहार होते है. यही कारण है कि ये खरपतवार को अच्छे से खत्म करते है.

ई. बकरियों के विपरीत, भेड शायद ही किसी पेड को नुकसान पहुँचाते है.

एफ. ऊन, मांस और खाद का उत्पादन में चरवाहे को आय के तीन विभिन्न स्तोत्र प्राप्त होते है.

जी. उनके होठों की बनावट फसल की कटाई के समय खोए अन्न के दानों को साफ करने में सहायक होती है और इस प्रकार यह अपशिष्ट आहार को लाभदायक उत्पादों में परिवर्तित करता हैं.

एच. मटन एक प्रकार का मांस है जिसके लिए भारत के किसी भी समुदाय से कोई पूर्वाग्रह नहीं है और साथ ही भारत की अर्थव्यवस्था में मटन उत्पादन के लिए बेहतर नस्लों के विकास के लिए एक बहुत बडी संभावना है.

  1. भेड पालन के लिए सभवनाएं और इसका राष्ट्रीय महत्व

पशुपालन विभाग की वार्षिक रिपोर्ट 2012-13 के अनुसार देश में 71.6 मिलियन भेड हैं. भेड पालन की दृष्टि से यह दुनिया में छठे स्थान पर है. कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के कुल निया्रत मूल्य में मांस के निर्यात में भेड का योगदान 8 प्रतिशत है. चमडा और चमडे के उत्पादों केरुप में भेड की खाल का भी निर्यात किया जाता है. समाज के आर्थिक रुप से कमजोर वर्गों की आजीविका चलनो में भेडों का एक मूल्यवान योगदान है. पशुधन मालिकों के बीच चरवाहें बहुत गरीब है.

  1. भेड पालन के लिए वित्तीय सहायता

भेड पालन शुरु करने के लिए नाबार्ड से पुनर्वित सुविधा के साथ बैंकों से ऋण उपलब्ध है. बैंक ऋण प्राप्त करने के लिए, किसानों को उनके क्षेत्र में स्थित वाणिज्यिक, सहकारी या क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की निकटतम शाखा में वित्त पोषक बैंक की शाखाओं में उपलब्ध निर्धारित आवेदन पत्र में आवेदन करना चाहिए. बैंक से जुडा तकनीकी अधिकारी या बैंक प्रबंधक किसानों को ऋण प्राप्त करने के लिए परियोजना रिपोर्ट तैयार करने में मद्द कर सकते हैं/ मार्गदर्शन दे सकते हैं. भेड विकास योजनाओं के लिए बडे परिव्ययवाली विस्तृत रिपोर्ट तैयार करनी होगी. उच्च मूल्य की परियोजनाओं के लिए उधारकर्ता नाबार्ड कंसल्टेंसी सर्विसेज (नैबकाँस) की सेवाओं का उपयोग कर सकते हैं जिनके पास विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने का व्यापक अनुभव हैं.

  1. योजना तैयार करना.

राज्य पशुपालन विभाग के स्थानीय तकनीकी व्यक्तियों, डीआरडीए, भेड विकास निगम, भेड सहकारी समिति / संघ / महासंघ और वाणिज्यिक किसानों से परामर्श के बाद किसी लाभार्थी द्वारा एक योजना तैयार की जा सकती है. यदि संभव हो तो, लाभार्थियों को आसपास के क्षेत्र में प्रगतिशिल भेड किसानों और सरकार / कृषि विश्वविदयालय, भेड चरागाहों का दौरा करना चाहिए और भेड पालन की लाभप्रदता पर चर्चा करनी चाहिए. भेड पालन के लिए एक अच्छा व्यावहारिक प्रशिक्षण और अनुभव अत्याधिक वांछनीय होगा. राज्य सरकार का पशुपालन विभाग / भेड विकास विभाग / भेड विकास बोर्ड के प्रयासों के परिणामस्वरुप गांवों में स्थापित भेड सहकारी समितियां सभी समर्थन सुविधाएं, विशेष रुप से जीवित पशुओं और ऊन के विपणन के लिए सहायता प्रदान करेगी.

  1. अच्छी परियोजना की आवश्यकताएँ

परियोजना में इकाई का प्रकार और क्षमता के आधार पर विस्तार से तकनीकी, वित्तीय और प्रबंधकीय पहलुओं पर निम्नलिखित जानकारी शामिल होनी चाहिए :

तकनीकी

ए. पशु चिकित्सा केंद्रों और ऊन संग्रह केंद्र के लिए चयनित क्षेत्र ओर वित्तपोषक बैंक

की शाखा की निकटता

बी.नजदीकी पशुधन बाजार में अच्छी गुणवत्ता के पशुओं की उपलब्धता.

सी.प्रशिक्षण सुविधाओं का स्तोत्र.

डी.अच्छी चराई जमीन / भूमि की उपलब्धता.

ई. हरे / ड्राई चारे की उपलब्धता, चारा, दवाई आदि

च. योजना क्षेत्र के निकट पशु चिकित्सा सहायता और विपणन सुविधाओं की उपलब्धता.

वित्तीय :

ए. इकाई लागत – भेड इकाई की औसत लागत.

बी. आहार और चारा, पशु चिकित्सा सहायता, बीमा, आदि के लिए निविष्टि लागत

सी.उत्पादन लागत यानी जानवरों का बिक्री मूल्य, भेद बाडा आदि

डी.आय व्यय विवरण और वार्षिक सकल अधिशेष.

ई. नकदी प्रवाह विश्लेषण.

एफ. चुकौती अनुसूची यानी मूल ऋण राशि और ब्याज की चुकौती.

  1. परियोजना का मूल्यांकन

उक्त उल्लिखित पहलुओं पर विचार करके तैयार की गई परियोजना भेड पालन इकाई की स्थापना के लिए ऋण सुविधा का लाभ उठाने के लिए बैंक की निकटतम शाखा में प्रस्तुत की जानी चाहिए. बैंक इसके बाद इस परियोजना की तकनीकी व्यवहार्यता, वित्तीय व्यवहार्यता और बैंक साध्यता के लिए जांच करेंगे.

  1. बैंक ऋण की मंजूरी और उसका वितरण

तकनीकी व्यवहार्यता और आर्थिक व्यवहार्यता सुनिश्चित करने के बाद, बैंक द्वारा योजना मंजूर की जाएगी. विशिष्ट संपति जैसे शेड का निर्माण, उपकरण और जानवरों की खरीद के समक्ष ऋण चरणों में वितरीत किया जाता हैं. ऋण के अंतिम उपयोग को सत्यापित किया जाता है और बैंक द्वारा लगातार अनुवर्ती नजर राखी जाती है.

  1. उधार की शर्तें – सामान्य

8.1 परिव्यय :

परियोजना का परिव्यय स्थानीय परिस्थितियों, इकाई आकार और परियोजना में शामिल निवेश घटकों पर निर्भर करता है. परिव्यय की गणना के लिए बाजार की मौजूदा कीमतें / लागत पर विचार किया जा सकता है.

8.2 मार्जिन राशि :

मार्जिन उधारकर्ताओं की श्रेणी पर निर्भर करती है और यह 10% से 25% तक होती सकता है.

8.3 ब्याज दर :

बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक के समग्र दिशां निर्देशों के भीतर ब्याज दरों को तय करने के लिए स्वतंत्र हैं. हालांकि, मॉडल परियोजना की वित्तीय व्यवहार्यता और बैंक साध्यता कीगणना करने के लिए, ब्याज की दर 12.00% प्रति वर्ष मानी गई है.

8.4 जमानत :

सुरक्षा, भारतीय रिजर्व बैंक / नाबार्ड द्वारा समय समय पर जारी किए गए के दिशा निर्देशों के अनुसार होगी.

8.5 ऋण की चुकौती

ऋण की चुकौती परियोजना में सृजित सकल अधिशेष के आधार पर निर्धारित की जाती है. आम तौर परभेड पालन के लिए ऋण के पुनर्भुगतान की अवधि 6 से 8 वर्ष है.

8.6 बीमा :

जानवरों और अन्य परिसंपत्तियों (उपकरण, शेड) का बीमा किया जा सकताहै.

  1. भेड पालन का अर्थशास्त्र

100 भेड की एक इकाई के आकार के साथ भेड पालन के लिए एक मॉडल आर्थिक रुपरेखा नीचे दी गई है. यह सांकेतिक है और यथा लागू इनपुट और आउटपूट लागत और क्षेत्र स्तर पर पाए गए मानदंड शामिल किए जा सकते है.

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