पशु डेरी फार्मिंग एक महत्वपूर्ण साधन

डेरी फार्मिंग

  1. प्रस्तावना

लघु/सीमांत कृषकों और कृषि मजदूरों के लिए डेरी कार्य पूरक आमदनी का एक महत्वपूर्ण साधन है. इस गतिविधि में दूध के अलावा पशुओं से खाद भी मिलती है जोकि मिट्टी की उर्वरता और फसल उत्पादन में सुधार के लिए जैविक सामग्री का बहुत अच्छा स्त्रोत होता है. पशुओं के गोबर से गोबर गैस मिलती है जिसका उपयोग घरेलू कार्यों के लिए ईधन और कुंओं से पानी निकालने के लिए ईंजन चलाने में भी होता है. अतिरिक्त चारे और कृषि के सह-उत्पादों का लाभप्रद उपयोग पशुओं को बैलों से मिलती है. चूंकि कृषि कार्य मुख्यत: मौसमी होता है, इसलिए डेरी कार्य के माध्यम से बहुत से लोगों को पूरे वर्ष मिलने की संभावना है. इस प्रकार डेरी से पूरे वर्ष रोजगार भी मिलता है. डेरी कार्यक्रम के प्रमुख लाभार्थी लघु/सीमांत कृषक और कृषि मजदूर हैं.

  1. डेरी फार्मिंग की संभावनाएं और इसका राष्ट्रीय महत्व

विश्व में सर्वाधिक पशु संख्या भारत में है. विश्व की भैंसों की कुल संख्या का 57.3 प्रतिशत और कुल पशु संख्या का 14.7 प्रतिशत यहां है. 2011-12 में 3,05,484 करोड का दुग्ध उत्पादन हुआ. ग्यारहवीं पंचवषीय योजना के अंत में (2011-12) देश का कुल दुग्ध उत्पादन 127.9 मिलियन टन प्रति वर्ष था ओर 2020 तक इसकी मांग बढकर 180 मिलियन टन होने की संभावना है. इस मांग को पूरा करने के लिए दुग्ध उत्पादन की वृदधि दर वर्तमान के 2.5% से बढकर 5% होनी चाहिए. पशुपालन के माध्यम से दुग्ध उत्पादन बढाने की अपार गुंजाइश / संभाव्यता है.

  1. डेरी फार्मिंग के लिए बैंकों से उपलब्ध वित्तीय सहायता :-

बडे परिव्यय वाली डेरी योजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करनी होती है. वित्तपोषण की मदों में पूंजी आस्ति मदें जैंसे दुधारु पशुओं की खरीद. पशुशालाओं का निर्माण. यंत्रों आदि की खरीद शामिल हैं. एक/दो माह की प्रारंभिक अवधि के लिए पशुओं को चारा खिलाने की लागत कों पूंजीकृत किया जाता है और सावधि ऋण के रुप में दी जाती है. भूमि विकास, कुंआ खोदने, डीजल इंजन/पंपसेट को चालू करने, बिजली कनेक्शनों, नौकरों के लिए आवश्यक़ क्वार्टरों, गोदामों, परिवहन वाहनों, दुग्ध प्रसंस्करण सुविधाओं आदि को ऋण के लिए स्विकार किया जाता है. उच्च लागत वाली परियोजनाओं के लिए ऋणकर्ता, नाबार्ड कन्सलेटन्सी सर्विसेज (नैबकॉन्स) जिन्हें व्यापक परियोजना रिपोर्ट तैयार करने का बृहद अनुभव है, की सेवाओं का उपयोग कर सकते हैं.

  1. बैंक ऋण के लिए परियोजना बनाना
    • लाभार्थी द्वारा राज्य सरकार के पशुपालन विभाग, जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, डेरी सहकारी समिति /यूनियन /फेडरेशन /वाणिज्यिक डेरी किसानों के स्थानीय तकनीकी व्यक्तियों से परामर्श करने के बाद परियोजना बनाई जा सकती है. यदि संभव हो, तो लाभार्थी को नजदीकी प्रगतिशील डेरी फार्मों ओर सरकारी / सैन्य / कृषि विश्वविद्यालयों के डेरी फार्मों का दौरा करना चाहिए और डेरी फार्मिंग की लाभप्रदता के बारे में विचार-विमर्श करना चाहिए. अच्छा व्यावहारिक प्रशिक्षण और डेरी फार्मिंग का अनुभव अत्याधिक वांछनीय है. यदि गांव में डेरी सहकारी समितियां हैं, तो वे विशेष रुप से तरल दुग्ध की बिक्री के लिए सभी सहायक सुविधाएं उपलब्ध कराएंगी. डेरी फार्म की इस प्रकार की समिति, पशु सहायता केंन्द्र कृत्रिम गर्भाधान केंन्द्र से नजदीकी सुनिश्चित की जानी चाहिए.
    • इकाई के प्रकार और क्षमता के आधार पर परियोजना में निम्नलिखित तकनीकी, वित्तीय और प्रबंधकीय पहलुओं की सूचना होनी चाहिए.

तकनीकी

  • भूमि और भूमि विकास (स्थान, क्षेत्र, उपयुक्तता, सडक से नजदीकी, साइट मैप अदि.)
  • प्रस्तावित क्षमता / दुधारु पशुओं की संख्या.
  • सिविल निर्माण (शेड्स, भंडार कक्ष, दुग्ध कक्ष, कार्यालय कक्ष, स्टाफ कक्ष आदि)
  • उपकरण और संयंत्र एवं मशीनरी (चारा कटाई मशीन, सिलो पिट, दूध दुहने की मशीन, दाना चक्की एवं मिक्सर, मिल्किंग पेल्स /दूध के कैन, बायो गैस संयंत्र, बल्क कूलर्स, उत्पादों के निर्माण के लिए उपकरण, ट्रक /वैन)
  • पशुशाला – पशुशाला का प्रकार (आवश्यक क्षेत्र-एडल्टस, ओसर (1-3 वर्ष) पडवा/पडिया (एक वर्ष से कम) ]
  • पशु (प्रस्तावित प्रजाति, प्रस्तावित नस्ल, खरीदारी का स्तोत्र, खरीदारी का स्थान, दूरी, पशु की लागत)
  • उत्पादन मानदण्ड [दूध देने की अवधि का क्रम, दुग्ध की मात्रा (लीटर प्रति दिन) दूध देने की अवधि के दिन, दूध न देने के दिन, गर्भाधान दर, मृत्यू दर (%) – एडल्ट, क्रम उम्र पशु]
  • चारा (चारे और दाने का स्त्रोत – हरा चारा, सुखा चारा, दाना, चारे की फसले – बदलना – खरीफ, रबी, ग्रीष्म चारा उगाने के खर्चे, आवश्यकता और लागतें)
  • प्रजनन सुविधाएं (स्त्रोत, स्थान – दूरी (किमी), वीर्य की उपलब्धता, स्टाफ की उपलब्धता, प्रति पशु / वर्ष खर्च)
  • पशु चिकित्सा स्तोत्र (स्थान –दूरी (किमी.), श्रमिक और अन्य स्टाफ की उपलब्धता, उपलब्ध सुविधाओं के प्रकार, यदि निजी व्यवस्था है – पुश चिकित्सक /स्टॉकमैन/परामर्शदाता रखा गया, विजिट की आवधिकता, अदा की गई राशि /विजिट () प्रति पशु प्रति वर्ष व्यय)
  • बिजली (स्त्रोत, राज्य विद्युत बोर्ड से अनुमोदन, योजित भार, बिजली ने आने की समस्याएं, जेनरेटर के लिए व्यवस्थाएं)
  • पानी (स्त्रोत, पानी की गुणवत्ता, पीने के लिए पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता, सफाई और चारा उगाने के लिए, यदि निवेश किया जाना है, तो ढांचे के प्रकार, डिजाइन और लागत)
  • दुग्ध का विपणन (बिक्री के स्त्रोत, डिस्पोजल का स्थान, दूरी (किमी) प्राप्त मूल्य (प्रति लीटर दूध) भुगतान का आधार, भुगतान की आवधिकता)
  • अन्य उत्पादों का विपणन (पशु – उम्र, बिक्री का स्थान, वांछित मूल्य, खाद मात्रा /पशु , मूल्य /इकाई (े) खाली बोरे – संख्या , मूल्य /बोरा (े))

वित्तीय :

  • वित्तीय व्यवहार्यता (आंतरिक प्रतिफल दर, लाभ लागत अनुपात, निवल, वर्तमान मालियत)
  • उधारकर्ता की वित्तीय स्थिति (लाभप्रदता, अनुपात, ऋण इक्विटी अनुपात, क्या आयकर और अन्य कर देयताओं का भुगतान आद्यतन किया गया है, क्या लेखापरीक्षा अद्यतन है)
  • ऋण की शर्तें (ब्याज दर, अनुग्रह अवधि, चुकौती अवधि, प्रतिभूति का प्रकार)

प्रबंधकीय

उधारकर्ता का प्रोफाईल

  • व्यक्ति / साझेदार / कंपनी /कार्पोरेशन / सहकारी समिति / अन्य
  • प्रस्तावित गतिविधि अथवा अन्य़ का अनुभव.
  • वित्तीय मजबूती
  • तकनीकी और अन्य विशेष योग्यताएं
  • तकनीकी / प्रबंधकीय स्टाफ और उसकी पर्याप्तता.

Farming Dairy

  • वित्तपोषक बैंक का नाम
  • प्रशिक्षण सुविधाएं
  • राज्य / केन्द्र सरकार से उपलब्ध सहायता
  • नियामक अनुमति, यदि कुछ हो.
  1. परियोजना का मूल्यांकन

इस प्रकार तैयार की गई योजना बैंक की नजदीकी शाखा में जमा की जानी चाहिए. बैंक का अधिकारी योजना तैयार करने अथवा निर्धारित आवेदन फार्म भरने में मद्द कर सकता है. इसके बाद तकनीकी व्यवहार्यता और आर्थिक साह्यता के लिए बैंक द्वारा योजना की जांच की जाएगी.

  1. बैंक ऋण की मंजूरी और वितरण

योजना की तकनीकी व्यवहार्यता और आर्थिक साध्यता सुनिश्चित करने के बाद बैंक द्वारा मंजूरी दी जाती है. ऋण का वितरण विशिष्ट आस्तियों जैसे शेड्स के निर्माण उपकरण और मशीनरी की खरीद, पशुओं की खरीद, ½ माह की प्रारंभिक अवधि के लिए दाने / चारे की खरीद की आवर्ती लागत के समक्ष 2 से 3 चरणों में जिन्स के रुप में ऋण वितरण किया जाता है. बैंक द्वारा निधियों के अंतिम उपयोग का सत्यापन किया जाता है और लगातार अनुवर्तन किया जाता है.

  1. ऋण वितरण की शर्तें. – सामान्य
    • परिव्यय

परियोजना का परिव्यय स्थानीय स्थितियों, इकाई के आकलन और परियोजना में शामिल घटकों पर निर्भर करता हैं. परिव्यय की गणना के लिए प्रचलित बाजार मूल्यों को ध्यान में रखा जाना चाहिए.

  • मार्जित राशि

मार्जिन उधारकर्ताओं के श्रेणी पर निर्भर करता है और यह 10 से 25- के बीच होता है.

  • अंतिम लाभार्थी के लिए ब्याज दर

समग्र मार्गनिर्देशों के अंतर्गत ब्याज दर निर्धारित करने के लिए बैंक स्वतंत्र है. तथापि, मॉडल परियोजनाओं की वित्तीय व्यवहार्यता और बैंक ग्राहयता की गणना के लिए हमने ब्याज दर 12% प्रति वर्ष मानी है.

7.4 प्रतिभूति

प्रतिभूति नाबार्ड /भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी समय-समय पर जारी मार्गनिर्देशों के अनुसार होगी.

  • ऋण की चुकौती अवधि

चुकौती अवधि योजना में समग्र अधिशेष पर निर्भर करती है. ऋण की चुकौती समुचित मासिक /तिमाही किस्तों में सामान्यत: 5 से 7 वर्ष की अवधि में की जाएगी.

7.8 बीमा

पशुओं और पूंजीगत आस्तियों का वार्षिक रुप से अथवा दीर्घकालीन मास्टर पॉलिसी द्वारा, जहां भी लागू हो, बीमा कराया जाना चाहिए.

  1. डेरी फार्मिंग की आर्थिक गणना.

10 भैंसों वाली मॉडल परियोजना नीचे दी गई है. यह निदर्शनात्मक है और प्रयोज्य निविष्टियों ओर आउटपुट के साथ-साथ क्षेत्र स्तर पर देखे गए मानदण्ड भी शामिल किए जाएं.

  • पूंजी लागत
पशुओं की लागत 500000
परिवहन लागत 10000
पशुशाला का निर्माण 60000
काफ शेड का निर्माण 24000
चारा कटाई मशीन ओर उपकरणों की लागत 60000
जोड 654000

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *