तुलसी का उत्पादन

तुलसी प्राचीन समय से ही एक पवित्र पोधा  जाता है। जिसे हर घर में लगाकर पूजा आदि होती है।
तुलसी का आयुर्वेद में बहुत बड़ा स्थान है। तुलसी से बहुत सारे रोगों का उपचार किया जाता है। इसका प्रतिदिन सेवन करने से कई प्रकार के रोगों से राहत मिलती है।
वर्तमान में इसे ओषीधिय खेती के रूप में किया जाने लगा है।
यह पुरे भारत में पाया जाता है। इसकी कई प्रकार की जातीया होती है जेसे:- ओसेसिम बेसिलिकम,ग्रेटीसिमम,सेकटम,मिनिमम,अमेरिकेनम।

तुलसी लगाने के लिए खेत की तेयारी केसे करे:-

खेत में प्रथम जुताई से पहले 200 से 300 किवंटल अच्छी पक्की हुई खाद को खेत में बिखर दे ताकि वह मिटटी में अच्छी तरहा से गुलमिल जाये। अंतिम जुताई करते वक्त आप रासयनिक खाद जिसमे यूरिया 100kg और 500kg सुपर फास्फ़ेट और 125 kg म्यूरेट ऑफ़ पोटाश प्रति हेक्टर के हिसाब से एक समान पुरे खेत में बिखेर दे।
तुलसी के रुपाई के 20 दिनों के बाद खेत में आवश्यक नमी का ध्यान रखकर 50kg यूरिया देवे। दूसरी और तीसरी कटाई के तुरंत बाद भी 50kg यूरिया फसल को देवे यूरिया देते वक्त ध्यान रखे की यूरिया पोधो के पत्तो पर ना गिरे।

तुलसी को खेत में केसे लगाये:-

1 नर्सरी में पोधे तेयार कर के
एक हेक्टेयर के लिए अच्छी किस्म का 300 या 400 ग्राम बीज ले फिर नर्सरी लगाने वाली जमीन की अच्छी जुताई और खाद दे कर उसमे 1 मीटर की 8 से 10 क्यारिया 1 हेक्टर के लिए तेयार कर ले। क्यारी को जमीन से 75सेमी ऊपर उठाना चाहिए और क्यारी से क्यारी की दुरी 30सेमी रखे ताकि खतपतवार को आसानी से निकला जा सके। प्रति क्यारी में 15सेमी की दुरी से बिजो को लगाये लगभग 100 बीज  एक क्यारी में आ जायेगे। बीजो को मिटटी में से ढक देने के बाद उसे पर्याप्त पानी छिडकते रहे 8 से 12 दिनों के बाद बीज अंकुरित हो जाते है। फिर समय समय पर निदाई गुड़ाई और सिचाई करते रहे। जब पोधे 12 से 15सेमी की लम्बाई के हो जाये तो उन्हें सावधानी पूर्वक निकाल के खेतो में रोप सकते है।
2 शाखाओ द्वारा रोपण:-
तुलसी का प्रसारण बीज के अलावा टहनियों से भी किया जाता है। उसके लिए तुलसी की 10 से 15सेमी की टहनी को काटकर उसे छाया में रखकर सुबह साम हजारे से पानी देते रहे भूमि में एक माह के भीतर उसकी जडे विकसित हो जाती है और नई पत्तिया निकलने लगती है। उसके बाद उसे वहा से निकाल कर खेत में रोप सकते है।
पोधे की रोपाई केसे करे:-
जब पोधे नर्सरी में तेयार हो जाये तो उनमे से स्वस्थ पोधो को जुलाई के प्रथम सप्ताह में 45×45सेमी की दुरी पर पोधे रोपे। यदि आप आर.आर.ओ.एल.सी.किस्म की तुलसी लगा रहे हो तो 50×50सेमी की दुरी जरुर रखे।

तुलसी की सिचाई केसे करे:-

पोधे रोपन के बाद हलकी सिचाई की आवश्यकता होती हे।गर्मी के दिनों में 15 दिन के अंतराल में सिचाई करे। पहली फसल कटाई के बाद भी तुरतं बाद सिचाई आवश्यक होती हे। सिचाई से पहले यूरिया उपर लिखे अनुसार देवे। जब भी फसल कटाई हो उसके 10 दिन पहले सिचाई बंद कर देना चाहिए।

खतपतवार नियन्त्रण और खुदाई निदाई:-

तुलसी के खेत में बहुत प्रकार के खतपतवार उग जाते है जो फसल की पैदावार में दिक्कत करते है और पोषक तत्वों के का नाश करते है इसलिए उन्हें रोपाई के 20 दिन बाद खतपतवार को निकाल लेना चाहिए फिर जब भी खतपतवार उगे तो उन्हें नष्ट करना चाहिए। यदि आप एक से अधिक फसल लेना हो तो 10 दिन के अन्तराल में खतपतवार निकालते रहना चाहिए।

फसल की कटाई:-

तुलसी की फसल में कटाई का बहुत महत्व होता है क्यों की कटाई का सीधा असर तेल की मात्रा पर पड़ता है। इसलिए जब पोधो की पत्तियों का रंग पूरा हरा हो जाये तो कटाई कर लेना चाहिए। फुल आने के बाद तेल की मात्रा और गुणवक्ता पर असर पड़ता है। कटाई हमेशा ऊपरी भाग में करना चाहिए ताकि फिर से नए शाखाये और पत्ते आ सके।कटाई हमेशा दराती की मदद से काटना चाहिए।तुलसी की उन्नतशील किस्म जेसे R.R.L.O.P हे जिसकी तिन बार तक कटाई हो सकती है। जिसकी पहली कटाई जून और दूसरी कटाई दिसम्बर और तीसरी नवम्बर में की जाती है। इस किस्म की फसल की कटाई सतह से 30सेमी ऊपर से कटना चाहिए।

तुलसी की आसवन प्रक्रया:-

इस विधि में फसल से तुलसी का तेल निकाला जाता है जिसका प्रयोग बहुत से माउथ वाश सलाद मुररबा आदि में तुलसी का फेलेवेर लाने के लिए उपयोग होता है।आसवन हमेशा ताज़ा फसल से ही किया जाना चाहिए ताकि तेल और गुणवक्ता अधिक मिले।एक हेक्टर तुलसी की फसल से तकरीबन 170kg तक तेल निकल सकता हे।आसवन विधि से तेल निकलने के बाद बची हुई पत्तियों से खाद और बची हुई लकड़ी जलाने के काम आ जाती हे।

तुलसी का उत्पादन :-

तुलसी की खेती करने से प्रथम वर्ष में किसान को 400 किवंटल और उसके बाद वाले वर्षो में लगभग 700 किवंटल शाकीय उत्पादन मिलता है।

सरकार की तरफ से योजना:-

तुलसी की खेती पर कई राज्यों में शासन द्वरा अनुदान भी दिया जाता हे। अनुदान के लिए आप अपने जिले के विरिष्ट उधानिकी विभाग में सम्पर्क कर सकते है।

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