घर बैठे मोमबत्ती उद्योग

 

मोमबत्ती उत्पादन एक ऐसा काम है, जिसे घर बैठ कर घरेलू उद्योग की तरह भी किया जा सकता है और बड़े स्तर पर फैक्टरी लगा कर भी. लेकिन किसी भी तरह का काम शुरू करने से पहले मोमबत्ती उत्पादन का प्रशिक्षण लेना जरूरी है. रंग-बिरंगी और खूबसूरत मोमबत्तियां अपनी सुंदरता और झिलमिल रोशनी से हर किसी का दिल जीत लेती हैं. यही वजह है कि मोमबत्ती उद्योग ग्रामीण स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बना चुका है. इस क्षेत्र में स्वरोजगार की संभावनाओं का तेजी से विकास हो रहा है. आप भी इससे जुड़ कर अपना करियर बना सकते हैं. यह करियर दो रूपों में बनाया जा सकता है- एक किसी मोमबत्ती उद्योग में नौकरी करके और दूसरा खुद का व्यवसाय शुरू करके.

 

क्या है मोमबत्ती उत्पादन :

मोमबत्ती उत्पादन एक क्रिएटिव काम है. एक अच्छा आर्टिस्ट अच्छा मोमबत्ती उत्पादक बन सकता है. मोमबत्ती उत्पादन में डिजाइन के साथ कलर कॉम्बिनेशन की समझ होना जरूरी है, पर इसकी मैन्युफैक्चरिंग को समझने के लिए ट्रेनिंग लेना जरूरी है.

 

सरकारी सहायता :

मोमबत्ती उत्पादन लघु उद्योग की श्रेणी में आता है. केंद्र और राज्य सरकारों का खादी ग्रामोद्योग इसे बढ़ावा देने के लिए नए-नए प्रोत्साहन और प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाती रहता है. एक सर्वे के अनुसार भारत में मोमबत्ती का बाजार लगभग 8 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है. नए उद्यमियों को सरकार हर तरह की सहायता देती है. महिलाओं, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जन जाति वर्ग से जुड़े लोगों को ऋण में 30 प्रतिशत तक छूट भी मिलती है.

 

कोर्स :

आप अगर रंगीन और ज्यादा अच्छी मोमबत्ती बनाने का प्लान करते हैं और आपको मोमबत्ती बनाने का काम सीखना है तो आप परेशान ना हों क्योकि अब हर राज्य के अन्दर सरकारी संस्थायें इस तरह के काम कर रही हैं. साथ ही साथ कई प्राइवेट संस्थान भी मोमबत्ती बनाने का कोर्स करा रहे हैं.

 

शुरुआती खर्च :

 

मोमबत्ती उद्योग कुटीर उद्योग है, इसलिए इसे कम पूंजी में भी शुरू किया जा सकता है. आप दस हजार से एक लाख रुपये तक की पूंजी में इस व्यवसाय को शुरू कर सकते हैं.

 

कच्चा माल समझिये :

आपको इस उद्योग को करने के लिए दो चीजों की आवश्यकता होती है जिन्हें हम कच्चा माल कहते हैं. पहली चीज है सूत और दूसरी चीज है मोम. सूत तो आपको कहीं भी मिला जायेगा और मोम आपको रिफायनरी से प्राप्त हो जायेगा. आप इन दोनों चीजों की सहायता से मोमबत्ती बनाने का काम कर सकते हैं. आज बेशक भारत में बिजली हर गाँव में पहुचने लगी है किन्तु फिर भी भारत के अन्दर मोमबत्ती की डिमांड हजारों की रोज बनी हुई है. सबसे बड़ी बात यह है कि त्योहारों के समय तो मोमबत्ती की डिमांड लाखों-करोड़ों की होती है. और आजकल मोमबत्ती बनाने की कुछ मशीने भी आ गयी हैं और वह काफी सस्ती हैं.

 

सामग्री :

  1. मोम (wax).
  2. मोमबती के धागे (wicks).
  3. मोमबती रखने के लिए पॉट.
  4. ईथर के तेल.
  5. काँच का बर्तन.
  6. सॉस पैन या पॉट.
  7. कटार या चीनी काँटा.
  8. टेप.
  9. स्टोव.
  10. कैंची.

 

मोमबत्ती बनाने का तरीका विस्तार से :

A)

1)            मोम को पिघलाने के लिए किसी बड़े से बर्तन अर्थात कढ़ाई में रखकर चूल्हे पर रख दें. इसको कढ़ाई में 80 से 90 डिग्री की आंच पर पिघलने दें . यह आप थर्मामीटर के माध्यम से चेक कर सकते हैं.

2)            आप मोमबत्ती अर्थात Candle को जो भी रंग देना चाहते हैं. इसमें मिला दें . ध्यान रहे चूल्हे में मोम पिघलाते समय जब आप इसमें रंग मिला रहे होते हैं . तो जिस रंग की मोमबत्ती आप चाहते हैं . जब पिघले हुए मोम का वही रंग हो जाय . तो आप उसमे थोड़ा सा रंग और मिला सकते हैं . क्योकि मोम ठंडा होने पर मोम का रंग थोड़ा बहुत फीका पड़ सकता है . तो आप जिस रंग की भी मोमबत्ती  बनाना चाहते हैं . यदि कढ़ाई में वही रंग हो जाय तो थोड़ा बहुत रंग उसमे और मिला दें . जिससे आपको आपके मन मुताबिक रंग की मोमबत्ती मिल सके .

3)            सांचो में धागे को लपेटने की क्रिया तीसरी क्रिया है. अब जो साँचा या जिस साँचे में आप मोमबत्ती  को बनाना चाहते हैं . उसमे आपको धागा लगाना है . धागे का उपयोग मोमबत्ती अर्थात Candle की गोलाई देख कर करें . अर्थात एक मोटी मोमबत्ती या के लिए साधारण तौर पर थोड़ा सा मोटा धागा ही उचित होता है .

B)

4)            अब थर्मामीटर से कढ़ाई में पिघलते हुए मोम का तापमान चेक करें. यदि यह तापमान 195 डिग्री से ऊपर और 250 डिग्री से नीचे है . तो किसी बर्तन द्वारा अपना मन मुताबिक अर्थात जितना आपके साँचे में मोम आ सकता है . बर्तन में निकाल लें आप किसी Alluminium के जग का इस्तेमाल कर सकते हैं .

5)            यदि आप अपनी मोमबत्ती में कुछ खुशबू डालना चाहते हैं. तो जिस जग (बर्तन ) में आपने पिघला हुआ मोम निकाला हुआ है . उसमे इत्र के तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं .

6)            पिघले हुए मोम को सांचो में डालने से पहले यह सुनिश्चित कर लें. कि उनमे धागा सही से लपेटा गया है . उसके बाद पिघला हुआ मोम सांचो में डाल दें .

7)            15-20 मिनट मोम के ठन्डे होने का इंतज़ार करें. अब साँचे को खोलकर या धागो को खींचकर भी आप मोमबत्ती अर्थात कैंडल को सांचो से बाहर निकाल सकते हैं . और अधिक मोमबत्ती बनाने के लिए यह प्रक्रिया बार बार करें . और मोमबत्ती बनाने की क्रिया को अपने घर बैठे कमाई का जरिया बनायें .

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *