कैसे शुरू करें डेयरी पालन उद्योग ….

परिचय

देशों के बीच शब्दावली अलग-अलग है। उदाहरण के लिए, संयुक्त राज्य अमेरिका में एक फार्म जहां दूध निकालने का काम होता है मिल्किंग पार्लर के नाम से जाना जाता है। न्यूजीलैंड में ऐसी इमारत का ऐतिहासिक नाम मिल्कंग शेड है- हालांकि हाल के कुछ वर्षों में प्रगतिशील परिवर्तन के फलस्वरूप इन इमारतों को फार्म डेयरी के नाम से पुकारा जाने लगा है।

कुछ देशों में, विशेष रूप से जहां पशुओं की संख्या कम है, उदाहरण के तौर पर छोटे डेयरी में दूध निकालने के साथ-साथ एक संसाधन द्वारा दूध से मक्खन चीज़ और दही बनाने का काम होता है। ख़ास तौर पर यूरोप में विशेषज्ञ दूध उत्पाद के उत्पादन का यह एक पारंपरिक तरीका है। संयुक्त राज्य अमेरिका में डेयरी वह जगह भी हो सकती है जहां डेयरी उत्पादों का प्रसंस्करण, वितरण और बिक्री होती है, या एक कमरा, भवन या स्थान होता है जहां दूध को संग्रहीत कर, संसाधित कर मक्खन या चीज़ जैसे उत्पाद बनाए जाते हैं। न्यूजीलैंड की अंग्रेजी में डेयरी शब्द का प्रयोग विशेष रूप से सुविधाजनक दुकान या सुपरएट को संदर्भित करता है। इसका उपयोग ऐतिहासिक है, क्योंकि ऐसी दुकानें लोगों के लिए एक आम जगह थी जहां से दूध उत्पाद खरीदे जाते थे।

गुणवाचक रूप में, डेयरी शब्द संदर्भित है दूध आधारित उत्पादों से, व्युत्पादित और संसाधन और जानवर एवं उनके कार्यकर्ताओं इस उत्पादन में शामिल हैं: उदाहरण के लिए डेयरी गाय डेयरी बकरी. एक डेयरी फार्म दूध का उत्पादन करता है और एक डेयरी कारखाना संसाधन द्वारा कई किस्म के डेयरी उत्पाद तैयार करता है। ये प्रतिष्ठान डेयरी उद्योग का गठन करते हैं जो खाद्य उद्योग का ही एक घटक है।

शैक्षिक योग्यता

आप चाहें तो डेयरी उद्योग की बारीकियों को समझने के लिए प्रशिक्षण भी ले सकते हैं| ऐसे कई संस्थान हैं, जो डेयरी उद्योग का प्रशिक्षण देते हैं| प्रशिक्षण लेने के लिए कोई निश्चित शैक्षिक योग्यता या आयु सीमा निर्धारित नहीं है| डेयरी उद्योग को स्वरोजगार के रूप में अपनाने की ख्वाहिश रखनेवाले इन संस्थानों में दाखिला ले सकते हैं| हां, मगर डेयरी प्रोडक्शन के पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश लेने के लिए उम्मीदवार का 60 प्रतिशत अंकों के साथ बीएससी पास होना आवश्यक है|

डेयरी पालन उद्योग कैसे शुरू करें
यह उद्योग 5 से 10 गाय या भैंस के साथ शुरू किया जा सकता है।

आहार
गाय या भैंसों को एक निश्चित समय पर भोजन दिया जाना जरूरी है। रोजाना खली में मिला चारा दो वक्त दिया जाना चाहिए। इसके अलावा बरसीम, ज्वार व बाजरे का चारा दिया जाना चाहिए। दूध की मात्रा बढ़ाने के लिए बिनौले का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। डेयरी मालिक यह भी ध्यान रखें कि आहार बारीक, साफ-सुथरा हो, ताकि जानवर अपने आहार को चाव से खा सके। इन्हें 32 लीटर पानी अवश्य पिलाया जाए। इनके स्वास्थ्य के लिए इतना पानी जरूरी है।

बचाव
डेयरी पालकों को चाहिए कि वे दर्द निवारक दवाओं को अपने पास रखें, ताकि जरूरत पर उनका उपयोग किया जा सके। गाय व भैंसों को अलग-अलग खूंटों पर बांधना चाहिए, क्योंकि तंग जगह में पशुओं को बीमारी होने का डर रहता है। चिकनपॉक्स, पैर व मुंह की बीमारी आम बात है, इसलिए समय-समय पर पशु-चिकित्सकों से भी सलाह लेते रहना चाहिए।

फायदेमंद प्रजातियां

भारत में 32 तरह की गायें पायी जाती हैं| गायों की प्रजातियों को तीन रूप में जाना जाता है, ड्रोड ब्रीड, डेयरी ब्रीड और ड्यूअल ब्रीड| इनमें से डेयरी ब्रीड को ही इस उद्योग के लिए चुना जाता है| दुग्ध उत्पादन की दृष्टि से भारत में तीन तरह की भैंसें मिलती हैं, जिनमें मुर्रा, मेहसाणा और सुरती प्रमुख हैं| मुर्रा भैंसों की प्रमुख ब्रीड मानी जाती है| यह ज्यादातर हरियाणा और पंजाब में पायी जाती है| मेहसाणा मिक्सब्रीड है| यह गुजरात और महाराष्ट्र में पायी जाती है| इस नस्ल की भैंस एक महीने में 1,200 से 3,500 लीटर दूध देती हैं| सुरती छोटी नस्ल की भैंस होती है, जो गुजरात में पायी जाती है| यह एक महीने में 1,600 से 1,800 लीटर दूध देती है| अकसर डेयरी उद्योग चलानेवाले इन नस्लों की उचित जानकारी न होने के चलते व्यापार में भरपूर मुनाफा नहीं कमा पाते| डेयरी उद्योग की शुरुआत पांच से 10 गायों या भैंसों के साथ की जा सकती है| मुनाफा कमाने के बाद पशुओं की संख्या बढ़ायी जा सकती है|

देखभाल पर जोर देना जरूरी

पाली गयी गायों व भैंसों से उचित मात्र में दुग्ध का उत्पादन करने के लिए उनके स्वास्थ संबंधी हर छोटी-बड़ी बात का ख्याल रखना जरूरी होता है| पशु जितने स्वस्थ होते हैं, उनसे उतने ही दूध की प्राप्ति होती है और कारोबार अच्छा चलता है| जानवरों को रखने के लिए एक खास जगह तैयार करनी होती है| जहां हवा के आवागमन की उचित व्यवस्था हो| साथ ही, सर्दी के मौसम में जानवर ठंड से बचे रहें| रख-रखाव के बाद बारी आती है पशुओं के आहार की| इसके लिए गायों या भैंसों को निर्धारित समय पर भोजन देना जरूरी होता है| इन्हें रोजाना दो वक्त खली में चारा मिला कर दिया जाता है| इसके अलावा बरसीम, ज्वार व बाजरे का चारा दिया जाता है| दूध की मात्र बढ़ाने के लिए भोजन में बिनौले का इस्तेमाल करना अच्छा रहता है| डेयरी मालिक के लिए इस बात का ख्याल रखना भी जरूरी होता है कि पशुओं को दिया जानेवाला आहार बारीक, साफ-सुथरा हो, ताकि जानवर भरपूर मात्र में भोजन करें| वहीं चारे के साथ पानी की मात्र पर ध्यान देना भी जरूरी है| गाय व भैंस एक दिन में 30 लीटर पानी पी सकती हैं| इसके अलावा डेयरी मालिक को पशुओं की बीमारियों व कुछ दवाओं की समझ भी होनी चाहिए|

ले सकते हैं सरकारी मदद

आज कई सरकारी व गैर-सरकारी संस्थाएं डेयरी उद्योग के लिए 10 लाख रुपये तक की लोन सुविधा उपलब्ध कराती हैं| इसके लिए डेयरी मालिक को तमाम कागज जैसे एनओसी, एसडीएम का प्रमाणपत्र, बिजली का बिल, आधार कार्ड, डेयरी का नवीनतम फोटो आदि जमा करना होता है| वेरीफिकेशन के बाद अगर संबंधित प्राधिकरण संतुष्ट हो जाता है, तो डेयरी मालिक को डेरी और पशुओं की संख्या के हिसाब से पांच से 10 लाख रुपये तक की राशि मुहैया करायी जाती है| डेयरी मालिक को यह राशि किस्तों में जमा करनी होती है| निश्चित समय पर किस्तों का भुगतान करने पर कुछ किस्तें माफ भी कर दी जाती हैं|

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